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Showing posts from February, 2024

Shelar Mama

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शेलार मामा   ज्या शेलारमामांबद्दल आपण ३५० वर्षांपेक्षा जास्त काळ ऐकत आलो आहोत आणि ज्यांना आपण त्यांच्या समार्थ्या बद्दल आणि शौर्या बद्दल ओळखतो त्यांचा खरं आणि पूर्ण नाव ' कोंडाजी रायाजी शेलार ' असं आहे. कोंडाजींच्या वडिलांचं नाव ' रायाजी कानोजी शेलार ' आणि आईचं नाव ' जनिबाई रायाजी शेलार ' असं होतं.  रायाजींना दोन अपत्य. एक पुत्र म्हणजे कोंडाजी आणि कन्या म्हणजे पार्वती. या दोघांचा जन्म सध्याच्या रायगड जिल्ह्यातील पोलादपूर तालुक्यातील कुडपण या गावी झाला .या गावाला खुप सुंदर असं नैसर्गिक वरदान लाभल आहे. तीन जिल्ह्यांच्या अगदी मधोमध हे गाव वसले आहे. घनदाट जंगल , गर्द वनराई , सह्याद्रीच्या  आभाळाला टेकणाऱ्या डोंगर रांगा आणि याच डोंगरां मधून येणारी जगबुडी नदी अश्या नैसर्गिक श्रीमंती असलेल्या ठिकाणी वसलेले कुडपण हे शेलार मामांचे गाव. बघता क्षणी डोळ्यांचे पारणे फिटेल इतके सुंदर आहे.  शेलार मामांची बहिण पार्वतीबाई यांचा विवाह गोडवली गावचे पाटील ' काळोजी मालुसरे ' यांच्याशी लावण्यात आला. काही काळानंतर कोंडाजींचा देखील विवाह जावळी खोऱ्यातील लक्ष्मीबाईं सोबत लावण्या

Maharaja Ranjit Singh

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 तो हॅलो दोस्तों तो आज हम एक और भारत मे बोहतसे इतिहासिक राजा ओने अपना धाडस और कौशल्य दीखाके इतिहास के पने पर अपना धाडस और कौशल्यको इतिहास के पने पर अपनी छाप छोड़ दी है। उन मे से आज हम एक राजा के बारे मे बात करेंगे जिनको आज हम सीख साम्राज के प्रमुख कहते है।  उन्हें सिख धर्म के पहले महाराजा के रूप में जाना जाता है। उ न्होंने 19वीं सदी के दौरान पंजाब को एकीकृत किया और उसे आरम्भिक ब्रिटिश शासन से बचाया। ऐसे महान राजा का नाम है महाराजा रणजीत सिंह महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में, सिख साम्राज्य ने काफी विस्तार किया और उन्होंने पंजाब को एक शक्तिशाली राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तो आज हम इनके बारे मे जानकारी लेंगे। महाराजा रणजीत सिंह की जीवनशैली: महाराजा रणजीत सिंह की जीवनशैली उनके विदेशी राजनीतिक सम्बन्धों, विजय और साम्राज्य का विस्तार, संघर्षों और साम्राज्य के विकास के साथ जुड़ी हुई थी। उन्होंने अपने शासनकाल में विभिन्न धर्मों, सांस्कृतिक समृद्धियों, और लोगों के साथ संबंध स्थापित किए। उनकी जीवनशैली मे

Samudragupta

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दोस्तों आज हम भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण राजा के बारे मे जानकारी लेंगे। जिनके उग को सोनेका उग भी कहा जाता था। उनके उग मे बहोत सारे शिलालेख  उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप को एक समृद्धि और सांस्कृतिक उत्थान का काल दिया। तो उनका नाम है समुद्रगुप्त समुद्रगुप्त को "कविराज" और "धर्मपुत्र" के उपाधि से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने शासनकाल में विजयोत्सवों और यात्राओं का आयोजन किया और कला, साहित्य, और विज्ञान में बृहद्धि को प्रोत्साहित किया। समुद्रगुप्त  समुद्रगुप्त जीवनशैली: समुद्रगुप्त का जीवनशैली उनके शासनकाल में एक समृद्धि और सांस्कृतिक उत्थान के कारण महत्वपूर्ण था। वे एक योद्धा और साहसी राजा थे जो अपने शासनकाल में भारतीय साम्राज्य को मजबूत करने के साथ-साथ कला, साहित्य, और विज्ञान में बृहद्धि को भी प्रोत्साहित करते रहे। यहां कुछ मुख्य पहलुओं के साथ समुद्रगुप्त की जीवनशैली का विवरण है: राजनीतिक कुशलता: राजनीतिक कुशलता एक नेता या शासक की योग्यता को सूचित करती है जिससे वह अपने राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने में समर्थ होता है। यह कुशलता और विवेकपूर्णता की एक मिश्रण ह